राजधानी रांची के राजकीय अतिथि शाला में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ आशा लकड़ा के द्वारा एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया गया एवं संथाल परगना क्षेत्र में हो रहे डेमोग्राफी चेंज पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग की सदस्य डॉक्टर आशा लकड़ा ने कहा कि संथाल परगना आज जल रहा है। झारखंड के लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और जामताड़ा जिला में अनुसूचित जनजाति समाज के लिए चलाए जा रहे योजनाओं के क्रियान्वयन को देखने और उसमें सुधार संबंधी सुझाव देने के बाद आयोग की सदस्य डॉक्टर आशा लकड़ा ने कई गंभीर विषयों को मीडिया के समक्ष रखा। डॉ आशा लकड़ा ने कहा कि साहिबगंज जिले में कई ऐसे घर हैं जिनमे महिलाएं जनजातीय समाज की है और मुखिया के पद को संभाल रही है लेकिन उनके पति रोहिंग्या मुसलमान है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कई लोगों और सामाजिक संगठनों से भी बातचीत की है। आयोग की सदस्य डॉक्टर आशा लकड़ा ने कहा कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं का पूरा लाभ जनजातीय समाज को नहीं मिल रहा है। साहिबगंज जिले के कई ऐसे गांव हैं जहां पहाड़िया समुदाय के लोग रहते हैं लेकिन वहां आज तक पेयजल और सड़क की सुविधा नहीं है। कुछ इसी तरह की समस्या गोड्डा जिले के कुछ गांव में भी देखने को मिला। गोड्डा जिले के बोआरि जोर गांव में बच्चों की मृत्यु दर ज्यादा देखने को मिली। वही गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के कई गांव में डेमोग्राफी चेंज का मामला सामने आया है।