मशहूर उद्योगपति रतन टाटा का निधन हो गया है. इस निधन से पूरे देश में शोक की लहर है. रतन टाटा ने मुंबई के ब्रीज कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. रतन टाटा का जन्म दिसंबर 1937 में हुआ था. भारत के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का पूरा नाम रतन नवल टाटा था. रतन टाटा को काफी दानवीर और दयालु कहा जाता है. उन्होंने टाटा समूह को फर्श से अर्श तक पहुंचाया. उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने रोज नई ऊंचाई को छुआ. हमारे-आपके घर तक अगर टाटा की पहुंच है तो उसकी वजह रतन टाटा ही हैं. रसोई से लेकर बेडरूम तक में टाटा के सामान हैं. आज चाय से लेकर जैगुआर लैंड रोवर कार और नमक बनाने से लेकर जहाज उड़ाने और होटलों का ग्रुप चलाने तक जिंदगी के विभिन्न क्षेत्रों में टाटा का जलवा नजर आता है. साल 2000 में पद्म भूषण और साल 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किए गए.
1990 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन थे और अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक अंतरिम चेयरमैन थे. रतन, टाटा ग्रुप के चैरिटेबल ट्रस्ट्स के प्रमुख थे.
रतन ने अपनी विरासत को एक नए मुकाम पर पहुंचाया. उन्होंने एअर इंडिया को अपने एंपायर में शामिल किया. विदेशी कंपनी फोर्ड के लग्जरी कार ब्रांड लैंडरोवर और जगुआर को भी अपने पोर्टफोलियो में जोड़ा. टाटा लोगों के लिए बड़े प्रेरणा स्त्रोत भी हैं. उनके कई कोट्स हमें जीवन जीने का सलिका सिखाते हैं. टाटा मोटर्स ने देश की पहली स्वदेशी कार टाटा इंडिका को लॉन्च किया. हालांकि सफलता नहीं मिली और कंपनी उस वक्त घाटे में चली गई. 1999 में टाटा ने अमेरिका की बड़ी कार कंपनी फोर्ड के साथ डील करने का फैसला लिया. लेकिन फोर्ड ने कहा यह डील करके वह टाटा पर एहसान ही करेंगे. जिसके बाद रतन टाटा ने फैसला लिया कि वे कार प्रोडक्शन यूनिट नहीं बेचेंगे. समय के साथ रतन टाटा डटे रहे और एक से बढ़कर एक कार को बाजार में लॉन्च किया. जिसमें कई प्रोजेक्टस सफल हुए.
रतन टाटा कहते हैं ‘जीवन में ऊंच नीच होना बहुत जरूरी है, ताकि हम आगे बढ़ते रहें। क्योंकि एक ईसीजी में भी सीधी लाइन का मतलब ये होता है कि हम जिंदा नहीं हैं।’ साथ ही कहते हैं ‘हमें कभी भी अपनी जड़ें भूलनी नहीं चाहिए। हम जिस जगह से आते हैं, उसपर हमें हमेशा गर्व होना चाहिए।’ रतन टाटा ने ग्लोबल बेंचमार्क सेट किया. रतन टाटा के नेतृत्व में ऐतिहासिक अधिग्रहण भी हुआ. जिसमें 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली, 6.2 बिलियन पाउंड में यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी कोरस, 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में प्रतिष्ठित ब्रिटिश कार ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया. रतन टाटा भले इस दुनिया से चले गए लेकिन वो हमारे दिल में हमेशा जिंदा रहेंगे.